Sunday, May 4, 2014

बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर हुई सरकार

हरियाणा सरकार ने राज्य में स्कूल जाने वाले बच्चों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षित परिवहन हेतु एक नीति नामत: (सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी) बनाई है।सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी के अंतर्गत स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए सुरक्षित परिवहन नीति और मानक तैयार करने के लिए राज्य, जिला और उप-जिला स्तर की समितियों का गठन किया गया है, जो राज्य स्तर कमेटी, जिला स्तर कमेटी और उप-जिला स्तर कमेटी है।
राज्य स्तर कमेटी परिवहन विभाग के प्रधान सचिव की अध्यक्षता में गठित की गई है, जो नीति को लागूकरने और स्कूल बसों की सुरक्षा के लिए तैयार किए गए मानकों को लागू करने के लिए बनाई गई। इस कमेटी में चेयरमैन परिवहन विभाग के प्रधान सचिव होंगें, जबकि परिवहन आयुक्त, आबकारी एवं कराधान आयुक्त, राज्य परिवहन विभाग के महानिदेशक, पुलिस महानिदेशक, उच्चतर शिक्षा विभाग के महानिदेशक, सैकेंडरी शिक्षा विभाग के महानिदेशक और प्राथमिक शिक्षा विभाग के महानिदेशक कमेटी के सदस्य होंगें। राज्य स्तर कमेटी को स्कूल बसों की सुरक्षा के मानकों को तैयार करने के लिए शक्तियां होंगीं। 
जिला स्तर कमेटी में चेयरमैन संबंधित जिला के उपाुयक्त होंगें। कमेटी में पुलिस अधीक्षक, क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण के सचिव, हरियाणा रोडवेज के महाप्रबंधक और जिला शिक्षा अधिकारी सदस्य होंगें। जिला स्तर कमेटी माह में एक बार बैठक करेगी और राज्य स्तर कमेटी द्वारा तैयार किए गए मानकों और नीतियों को लागू करने के लिए कार्य योजना तैयार करेगी। यह कमेटी जिला में स्कूल बसों का निरीक्षण करेंगी या संबंधित स्कूल के परिसर में या किसी अन्य स्थान पर जहां हरियाणा मोटर वाहन नियमों के प्रावधानों को स्कूल जाने वाले बच्चों के परिवहन को सुरक्षित हेतु लागू किया जा रहा हो। कमेटी द्वारा निरीक्षण कार्यक्रम इस प्रकार से तैयार किया जाए कि प्रत्येक स्कूल की प्रत्येक बस का निरीक्षण वर्ष में एक बार किया जा सकें। जिला स्तर कमेटी उपमंडल के लिए उप-जिला स्तर कमेटी हेतु निरीक्षण कार्यक्रम की योजना भी बनाएगी। 
उप-जिला स्तर कमेटी का गठन उपमंडल मैजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में किया जाएगा जिसमें वे चेयरमैन होंगें और पुलिस उपाधीक्षक, खंड शिक्षा अधिकारी, क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण के सचिव का प्रतिनिधि, हरियाणा रोडवेज के महाप्रबधक का प्रतिनिधि इस कमेटी में सदस्य होंगें। यह कमेटी तीन माह में एक बार बैठक करेगी और यह कमेटी जिला स्तर कमेटी द्वारा तैयार किए गए कार्यक्रम के अनुसार स्कूल बसों का निरीक्षण करेंगी या संबंधित स्कूल के परिसर में या किसी अन्य स्थान पर जहां हरियाणा मोटर वाहन नियमों के प्रावधानों को स्कूल जाने वाले बच्चों के परिवहन को सुरक्षित हेतु लागू किया जा रहा हो।कमेटी द्वारा निरीक्षण कार्यक्रम इस प्रकार से तैयार किया जाए कि प्रत्येक स्कूल की प्रत्येक बस का निरीक्षण वर्ष में एक बार किया जा सकें। उप-जिला स्तर कमेटी स्कूल बसों के निरीक्षण के संबंध में अपनी मासिक निरीक्षण रिपोर्ट जिला स्तर कमेटी को देगी। 
जिला स्तर कमेटी और उप-जिला स्तर कमेटी मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के प्रावधानों के अनुसार स्कूल जाने वाले बच्चों की बसों में सुरक्षित  परिवहन को सुनिश्चित करने व समय-समय पर न्यायालयों द्वारा जारी दिशानिर्देशों की पालना को लागू करना सुनिश्चित करेगी। 
    अनिवार्य आवश्यकताएं- 
- स्कूल बस या वाहन पीले रंग में होगा और जिसमें 254 मिलीमीटर चौडी नीले रंग की पटटी खिडकी से 178 मिलीमीटर नीचे होगी।
- स्कूल वाहन पर सामने की तरफ सफेत रिफलेक्टिव टेप होनी चाहिए और पीछे की तरफ लाल रंग रिफलैक्टर गाडी के अनुसार होगा और पीले रंग की रिफलैक्टिव टेप होगी। यह टेप 50 एमएम से कम चौडी नहीं होनी चाहिए और बीआईएस मानकों के अनुसार होनी चाहिए।
- वाहनों में स्पीड गर्वनर मानक एआईएस:018 के अनुसार होना चाहिए और यह स्पीड गर्वनर हरियाणा परिवहन आयुक्त कार्यालय से स्वीकृत डीलर व निर्माता द्वारा लगाया गया होना चाहिए। 
स्कूल बस में आगे और पीछे स्कूल बस लिखा होना चाहिए। 
- यदि स्कूल बस किराये पर ली गई है तो उस स्थिति में ऑन स्कूल ड्यूटी लिखा होना चाहिए। 
- स्कूल बस तथा वाहन पूरी तरह से फिट होने चाहिए ताकि वह सडक़ों पर चल सके और वाहन में फिटनैस प्रमाणपत्र और इंश्योरेंस प्रमाणपत्र भी होना चाहिए। 
- बस में प्रशिक्षित, अनुभवी तथा अच्छे स्वाभाव का चालक होना चाहिए, जिसमें एक अटेंडेंट या कण्डैक्टर भी हो।
- प्रत्येक वाहन, बस, वैन या ऐसा वाहन जो स्कूल के बच्चों को ले जाता हो, के पास परमिट तथा परमिशन होनी चाहिए।
- स्कूल बस और वाहन चलाने वाले चालक के पास कम से कम पांच साल का ड्राइविंग का अनुभव होना चाहिए।
- चालक के तीन बार से ज्यादा चालान नहीं होने चाहिए जैसेकि जम्पिंग रैड लाइट, गलत पार्किंग इत्यादि। 
- सभी स्कूल बसों या वाहनों में कण्डैक्टर या अटेंडेंट होगा और अटैंडेंट को बच्चों को सम्भालने का पर्याप्त अनुभव होना चाहिए। 
- शहर के किसी भी भाग में स्कूल बस या वाहन को 50 किलोमीटर प्रति घण्टा की रफतार से ज्यादा स्पीड रखने की अनुमति नहीं होगी। 
- सभी स्कूल तथा शिक्षण संस्थाओंं के पास चारदीवारी के अन्दर पार्किंग क्षेत्र होना चाहिए ताकि बसों तथा वाहनों द्वारा लाए गये बच्चों को स्कूल के अंदर छोडऩा सुनिश्चित हो सके । 
- सभी शिक्षण संस्थाओं के वाहनों में फस्ट एड बॉक्स और फायर एक्सटिंग्युशर नियमों के मुताबिक होना चाहिए। 
- स्कूल बस और वाहन में स्कूल का नाम, रूट और समय का बोर्ड लगा होना चाहिए। 
- बस के अंदर बस और वाहन के मालिक का नम्बर तथा पुलिस कंट्रोल रूम का नम्बर भी दर्शाया गया होना चाहिए। 
- परिवहन विभाग द्वारा  आयोजित किया जाने वाला रिफ्रैशर कोर्स में स्कूल बस तथा वाहनों के कण्डैक्टर और ड्राइवरों को तीन वर्ष में एक बार हिस्सा लेना होगा। 
- निर्धारित समयावधि में ड्राइवर और कण्डैक्टरों का कोर्स सुनिश्चित करना पंजीकृत वाहन मालिक की जिम्मेदारी होगी।
- शिक्षण संस्थाओं में सभी वाहनों के चालकों का तीन वर्ष में एक बार जिला सिविल सर्जन द्वारा मैडिकल फिटनैस भी करवाया जाना चाहिए।
- शिक्षण वाहनों के सभी चालकों और कण्डैक्टरों को वर्दी पहननी होगी और नेम प्लेट सहित ड्राईवर तथा कण्डैक्टर का लाइसैंस नम्बर भी दर्शाया गया होना चाहिए।
- किसी भी शिक्षण वाहन को उसके द्वारा पंजीकृत सिटिंग क्षमता से डेढ गुणा से अधिक बच्चों को नहीं ले जा सकता। 
- शिक्षण संस्थाओंं को अपने परिसर में परिवहन का नियंत्रण स्वयं की मैन पावर द्वारा करवाना होगा। 
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परिवहन विभाग की आयुक्त सुमिता मिश्रा ने बताया कि यदि किसी प्रकार की उल्लंघन की जाती है तो उस स्थिति में परिवाहन विभाग के एनफोर्समैंट अधिकारी मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 207 के तहत उसका चालान या जब्त कर सकते हैं और अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार आगामी कार्रवाई जैसेकि आरसी, परमिट, ड्राइविंग लाइसैंस को रद्द किया जा सकता है। स्कूल बस और वाहन में किसी भी प्रकार के टिंटिड गलास या पर्दे नहीं होने चाहिए। एक अप्रैल, 2014 के पश्चात स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए खरीदा गया नया वाहन जीपीएस प्रणाली लगाने के पश्चात सम्बन्धित पंजीकरण अथोरिटी द्वारा पंजीकृत होना चाहिए।

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